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कृषि-आर्थिक अनुसंधान (एईआर)

कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान (AER) योजना:
कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान (AER) योजना की शुरुआत वर्ष 1954–55 में की गई थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के कृषि-अर्थशास्त्रीय मुद्दों पर अनुसंधान करना तथा कृषि नीति निर्माण एवं ग्रामीण विकास के लिए अनुभवजन्य साक्ष्य उपलब्ध कराना है। वर्तमान में यह योजना देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों में स्थित 14 कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान केंद्रों/इकाइयों (AERCs/Us) के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है। यह योजना राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दोनों महत्व के मुद्दों पर अनुसंधान को बढ़ावा देती है। केंद्र स्थान-विशिष्ट तथा राष्ट्रीय स्तर के अध्ययन करते हैं, जो भारत की विविध कृषि-जलवायु, सामाजिक-आर्थिक एवं कृषि प्रणालियों को प्रतिबिंबित करते हैं। इन अध्ययनों को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों/विभागों की नीतिगत प्राथमिकताओं एवं आवश्यकताओं के अनुरूप कराया जाता है, जिसका उद्देश्य नीति निर्माण, कार्यक्रम कार्यान्वयन, निगरानी, मूल्यांकन एवं प्रभाव आकलन के लिए साक्ष्य-आधारित इनपुट उपलब्ध कराना है।

अर्थशास्त्र, सांख्यिकी एवं मूल्यांकन (ES&E) प्रभाग के अंतर्गत कार्यरत कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान (AER) इकाई योजना के कार्यान्वयन एवं समन्वय के लिए नोडल इकाई है। यह इकाई अनुसंधान, मूल्यांकन एवं विश्लेषणात्मक अध्ययनों के माध्यम से साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देती है। इन अध्ययनों में कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों तथा सरकारी कार्यक्रमों एवं हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता का आकलन किया जाता है।

AER इकाई देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों में स्थापित 14 कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान केंद्रों/इकाइयों (AERCs/Us) के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का समन्वय करती है। वर्तमान में इस नेटवर्क में 12 कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान केंद्र (AERCs) और 2 कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान इकाइयाँ (AERUs) शामिल हैं, जो भारत की विविध कृषि-जलवायु, सामाजिक-आर्थिक एवं कृषि प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए रणनीतिक रूप से स्थित हैं। दोनों कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान इकाइयाँ इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज (ISEC), बेंगलुरु तथा इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ (IEG), दिल्ली में स्थित हैं।

12 केंद्र विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंतर्गत कार्य करते हैं। इनमें जोरहाट, लुधियाना और जबलपुर स्थित 3 AERCs कृषि विश्वविद्यालयों के अंतर्गत; इलाहाबाद, दिल्ली एवं विश्व-भारती (शांतिनिकेतन) स्थित 3 AERCs केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अंतर्गत; तथा भागलपुर, चेन्नई, शिमला, वल्लभ विद्यानगर एवं वाल्टेयर स्थित 5 केंद्र संबंधित राज्य विश्वविद्यालयों के अंतर्गत कार्य करते हैं। पुणे स्थित AERC गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स, जो एक डीम्ड विश्वविद्यालय है, के अंतर्गत कार्यरत है। यह व्यापक संस्थागत नेटवर्क स्थान-विशिष्ट एवं राष्ट्रीय स्तर दोनों प्रकार के अध्ययन करने में सक्षम बनाता है तथा क्षेत्रीय रूप से प्रतिनिधित्व करने वाले और नीति-संबंधी प्रासंगिक अनुसंधान को सुनिश्चित करता है।

इस योजना को भारत सरकार द्वारा अनुदान-सहायता (Grants-in-Aid) के माध्यम से पूर्णतः वित्त पोषित किया जाता है और वर्तमान में इसे अन्य केंद्रीय व्यय (Other Central Expenditure) के अंतर्गत “कृषि-अर्थशास्त्रीय अनुसंधान (Agro-Economic Research)” नामक एक स्वतंत्र घटक के रूप में “कृषि अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी (Agriculture Economics & Statistics)” योजना के अंतर्गत कार्यान्वित किया जा रहा है।